Monday, July 3, 2017

जब जिंदगी ने यू टर्न ले ली......


   

वो शाम कुछ अजीब सी थी, दिल को लग रहा था कि कुछ तो अलग है लेकिन क्या ये जानने के लिए दिल बेचैन था, खिड़कियों से कभी झांकते तो कभी बालकनी में आना जाना कर रह था, मन नही लगा तो नीचे मार्केट में चला गया, सिगरेट की डिब्बी ली और चल पड़ा, कुछ समझ नही आ रहा था तो सोचा कि कुछ दूर पैदल चल लू, कुछ दूर ही आगे गया था, की सिगरेट जलाने की तलब हुई, सिगरेट जलाने ही वाला था की एक आवाज आई, कि  रोहन तुम और सिगरेट , ये कब से शुरू किया तुमने, उसकी आवाज से ही मुझे इल्म हो गया था कि ये गुंजन है , जिसने इतने अधिकार से मुझसे सवाल किया था, वो मुझसे कुछ पूछती इससे पहले मैंने बोला, अरे तुम किसी हो, यहाँ अचानक, सब ठीक तो है, वो मेरे सवालों का जवाब देती उससे पहले ही मेरी नजर उसके चेहरे पर गई, न मांग में सिंदूर था, न गले मे मंगल सूत्र, मैंने फिर सवाल किया ये क्या हाल बना रखा है तुमने, क्या हुआ ? मेरे सवालों को दोहराते हुए गुंजन ने बोला अरे बाबा वही तो पूछ रही हूँ, कि ये क्या हाल बना रखा है ? मैंने कहा ये सब तो ऐसे ही है ये छोड़ो तुम  बताओ  की माथे पर से सिंदूर गायब, न गले मे मंगलसूत्र आखिर हुआ क्या ? मायूसी भरे चेहरे के साथ वो बोली अब हम और सौरभ साथ नही है, मैन पूछा कि क्यों क्या हो गया ? वो बोली लम्बी कहानी है कभी और, फिलहाल मुझे देर हो रही है मैं बाद में मिलती हूँ, मैं कुछ और पूछता उससे पहले गुंजन bye बोल कर जा चुकी थी, मैं वही से उल्टे पाव रूम पे वापस चला आया, न खाना खाया  न पानी पिया, गहराती रात के साथ रफी और किशोर के नगमे मुझे बार बार गुंजन के बारे में सोचने पर मजबूर कर रहे थे । सिगरेट होटो पर लगा तो रहा था लेकिन जलाने की हिम्मत नही हो रही थी  न जाने गुंजन की बातें कानो में गूंजे जा रही थी, जैसे तैसे रात तो बीत गयी, सुबह से ही बाजार के चक्कर काटने शुरू कर दिए इस ख्याल से क्या पता गुंजन से मुलाकात हो जाये लेकिन 3 दिन इंतज़ार में ही कटे  । चौथे दिन एक unkonw नंबर से फोन आया , हाँ हेलो कौन , हा रोहन मैं गुंजन ,कहा हो तुम , क्या तुम मिल सकते हो अभी, मैने बिना किसी देर के कहा हा बोलो कहा आना है , उसने कहा कि यहा नही citiiwalk में मिलते है  मैंने झट से हा कहा और 4 बजे का वक़्त तय हुआ । मारे खुशी के तो जैसे मेरा ठिकाना ही न रहा, मैं वक़्त से पहले पहुँच कर इंतज़ार करने लगा, 4  बजकर 10 मिनट हो चुके थे,  गुंजन को मेरी नजरे बेसब्री से तलाश रही थी वक़्त 4 बजकर 30 मिनट हो चुका था लेकिन  वो अब भी नही आई, मैन सोचा कि उसे फोन करू, फिर नही किया, 5बज ने को हुआ तो मैंने सोचा अब तो फोन कर लेना चाहिए लेकिन तभी आवाज आई सॉरी , वो क्या है न बाल कोंब नही हो पा रहे थे, मैन मुस्कुरा कर बोला कोई बात नही, फिर गुंजन ने अपने मिलने का कारण बताया, दरअसल गुंजन अपने डिवोर्स को लेकर परेशान थी और बीते 3 दिन से वो इसी सिलसिले से यूपी के सहारनपुर में थी ।   अपने बीते 5 साल की पूरी दास्तान सुनाई, इसी बीच हमने हल्दीराम की राज कचौरी खाई और बीकानेर के मसाले डोसे हम दोनों बातों में इतने मसगुल थे कि वक़्त का पता ही नही चला कि कब 9 बज गए,  अपनी आप बीती सुनाते कभी गुंजन की आंखे नम होती  तो कभी मेरे जवाब पर वो मुस्कुरा देती , फिर रात में मैं और गुंजन साथ ही वहाँ से निकले, चूंकि रात हो गयी थी  तो मैंने गुंजन को ऑटो से उसके घर तक छोड़ दिया , फिर पूरी रात गुंजन की बातों को सोच कर बीत गयी ।कैसे उसके पति ने उसे यातनाएं दी कैसे वो अपने जिंदगी के 5 सबसे बुरे साल बिता कर आई थी , यही सब सोचते सोचते न जाने कब सुबह हो गयी  । मै आफिस के लिए तैयार ही हो रहा था तभी गुंजन का फोन आया कि यार क्या तुम मेरे लायक कोई नौकरी ढूंढ सकते हो ? मैन बिना कुछ सोचे हा बोल दिया और बोला कि एक cv तुम मुझे भेज दो ।  फिर मैं देखता हूँ ।  देर शाम गुंजन ने अपना cv भेज दिया था, मैं उसकी cv को एडिट कर रहा था तभी मेरे दोस्त अभिनव का फोन आया कि यार कोई अकाउंटेंट हो तो बता दे, उसके कंपनी को जरूरत है मैंने कहा कि कल तक का वक़्त दे बताता हूँ, । कल सुबह मैन अभिनव से मिलने का वक़्त  मांग लिया फिर मैं अभिनव के दफ्तर गया और उसे एक cv दी, cv देखते ही अभिनव ने कहा कि तू होश में तो है, तुझे ये कहा से मिली, फिर मैंने अभिनव को सारी कहानी बताई  , अभिनव ने मेरी बातों को सुन कर कहा कि यार क्या बुरी किस्मत है उसकी,  तेरे जैसे बतमीज़ से दूर हुई तो बेचारी के किस्मत में सनकी आ गया , खैर तू कॉफी पी मैं कोशिश करता हूँ । अभिनव  ने जिस बतमीज़ की बात की वो दरअसल बीते सालों में वो मेरे ऊपर पूरी तरह से हावी था, अपनी बात मैं सबसे मनवता तो था साथ ही सबसे बतमीजी से बात भी करता था, यही कारण था कि धीरे धीरे गुंजन मुझसे दूर हो गयी थी ।लेकिन वक़्त बदला और गुजन के जाने के बाद मैं भी .... वक़्त बीतता गया और बीतते वक़्त के साथ गुंजन और मेरी बात फिर ज्यादा ज्यादा देर के लिए होने लगी । गुंजन को अभिनव की कंपनी में नौकरी भी मिल गयी थी ।  6 महीने कब बीत गए पता ही नही चला, पहले तो एक दिन भी काटना मुश्किल था ।एक दिन अचानक  गुजन का फोन आया कि  कहा हो तुम अभी मिलो मुझसे , मैन बोला बताओ  कहा आना है  उसने बोला तुम कहा हो , मैं तो अपने कमरे में हूँ, kk आती हूँ । थोड़ी देर में गुजन मेरे घर पर थी , वो दरवाजे पर ही थी तभी मैने बोला कि ये मायूसी क्या बात है बताओ , गुजन के  जुबां से शब्द बाहर नही आये थे लेकिन उसकी आंखों की मोतियों ने बात बता दी , मैं उसे चुप करवा ही रहा था की वो सिसकते हुए बोली आज कोर्ट ने हमारे डिवोर्स पर मुहर लगा दिया है , और आज ही पिताजी मुझसे कोई मिश्रा जी के बेटे के बारे में सोचने को कह रहे है , मैन तो साफ साफ बोल दिया कि भाई मेरे बस की नही  ये शादी वादी, मुझे नही करना ।दोबारा गुजन की शादी के नाम से जो मेरे अंदर डर अभी जन्म ले रहा था  वो गुजन की आखरी बातों को सुन कर खत्म हो  गया । थोड़ी देर की चुप्पी के बाद गुजन ने मुझसे पूछा कि तुमने अभी तक शादी क्यों नही की , मेरे दिल ने कहा कि कैसे करता तुम जो चली गयी थी मुझसे दूर ,,, लेकिन जज्बातों को संभालते हुए मैने कहा कि जो गलतियां कि मैंने कम से कम इस जन्म तो उसका पश्चाताप कर लेने दो , मेरी बातों को गौर से सुन रही गुजन बोली अरे ऐसे कौन करता है , वो मुझसे कुछ और पूछती  उससे पहले मैने कहा कि जानती नही हो मुझे मैं तो जो चाहता हूँ वही करता हूँ ,, इस बात को बोलने के बाद मैं कॉफी बनाने चला गया  और गुजन पीछे से मुझे शादी करने के 50 फायदे गिनवाती रही ......