Tuesday, October 6, 2015

आत्मघाती : द सपोर्टर


मुझे मालूम है कि आप आत्मघाती शब्द सुन कर थोड़े घबरा से गये होंगे लेकिन मेरा मकसद आपको परेशान करने का बिल्कुल भी नहीं है। मैने इस शब्द को सोच समझ कर ईस्तमाल किया है । आज के मौजूदा दौर में कोई भी राजनीतिक दल हो आपको सोशल मीडिया पर उनके समर्थक दिख जाएंगे । वो हर तरह से अपने  पसंदीदा पार्टी का समर्थन करते है और साथ ही केवल और केवल उनके दिमाग में अपनी पार्टी के तारिफ के अलावा कुछ भी नहीं होता है । अगर आप इनके पसंदीदा पार्टी के विरोध में कुछ लिख दे तो ये जी-जान से उसके बचाव में और आपके खिलाफ गोलबंद हो जाते हैं। ये सही-गलत नहीं केवल अपने पार्टी का हीत देखते है । उनके लिए देश की उन्नती, लाभ ये ज्यादा जरूरी पार्टी के पक्ष को मजबूत करना है  इसलिए मैने ऐसे लोगो के लिए आत्मघाती शब्द का उपयोग है । हो सकता है कि मेरे विचार से आपका मत अलग हो लेकिन मैं आप पर आपके विचार बदलने का दबाव तो नही बना सकता लेकिन हम तर्क कर सकते है अगर वह त्थय पर आधारित हो।
ये जो सोशल मीडिया पर या वास्तविक दुनिया में किसी दल के समर्थक होते है वो सबकुछ भूल कर केवल अपने तर्क को मजबूत करते है चाहे उन्हें कुतर्क का ही सहारा लेना पड़ जाये । मेरे दिल में अक्सर ये  सवाल उठता है कि ये जो मोदी सरकार के समर्थक है उन्हें महंगी दाल , प्याज, बोर्डर पर मरते फौजी, फसल पर न्युनतम समर्थन मूल्य 50 प्रतिशन न बढ़ना,बात –बात पर यु-टर्न लेना, ललित गेट, व्यापम, चावल घोटाला, पार्टी अध्यक्ष का कैमरे पर घूस लेते पकड़ा जाना, मूजफ्फरनगर दंगे में पार्टी के लोगो की संदिग्द भूमिका, मरते किसान ,प्रधानमंत्री की चुप्पी , मोदी की  विदेश यात्रा का मीडिया का महीमामंडन करना क्यो नहीं दिखता है ? क्या वे ये सब जानबूझ कर रहे है, क्या उन्हें इससे कोई फायदा हो रहा है?
बात कांग्रेस की भी करें तो इनके समर्थक क्यो नहीं पुछते कि सब –कुछ गांधी परिवार के आस-पास ही क्यों घुमता हैं , क्या उन्हें कोलगेट, 2जी जैसे घोटाले नहीं चुभते, क्यो ये लोग राहुल गांधी के गुप्त यात्रा पर सवाल नहीं उठाते ,क्यो से सवाल नहीं करते कि सबसे ज्यादा राज करने वालो की पार्टी देश के इस हाल की जिम्मेदारी क्यो नहीं लेती ?
 केजरावाल के समर्थक हो,या फिर लालू, नीतिश ,आखिलेश ,ममता के ये लोग कैसे हे जो अपने पसंदीदा नेताओं के खिलाफ ना कुछ सुनना चाहते है और ना सवाल करके किसी की जवाबदेही तय करना चाहते है ? क्या ऐसे लोग देश के हीत में काम कर रहे हैं, क्या इनका चुप रहना देश को आगे ले जाऐगा या फिर ये अपने सुविधा अनुसार सब कुछ तय कर के बैठे है कि खुद भी न कुछ पुछेंगे और जो पुछेगा उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि वो सब कुछ भूल कर अपना दामन साफ करने में उलझ जाएंगे ?
ये कैसे समर्थक है जो अपने ही देश के लोकतंत्र के ढांचे को धवस्त करना चाहते है , ये लोग क्या आत्मघाती नही है?  अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टी या नेता का समर्थक है तो क्या वो किसी से सवाल नही कर सकता है?
हम ऐसे अनियंत्रित लोगो के चंगुल में फंसते जा रहा जो एक दिन  हमें अपना समर्थक बना लेगे या फिर अपने झुठ और सब कुछ देख कर भी अनदेखा कर देने का आडंबर कर हमें कुचल देंगे ।  खैर ,मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि देश को ऐसे आत्मघातियो से मुक्त किया जाये । इसके लिए हमें अपने पीठ पर ढाल लगाने की जरूरत है क्योकि ऐसे लोग कायर होते है कभी भी सामने से नहीं बल्कि पीछे से पीठ पर वार कर के हमें अपने जद में लेना चाहते है , तो क्या आप इस जंग के लिए तैयार है ?