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ये जो देश मेरा महान है ......!

 जय जवान और जय किसान, ये नारा तो हम सब जानते है कि किसने दिया है लेकिन अब ये एक सवाल भी है कि क्या अब भी जय किसान है , अगर है तो जो लोग कह रहे है कि इस देश में अब भी किसान की जय है तो फिर सवाल ये है कि उनपर गोली क्यों चलाई गई, मध्यप्रदेश की घटना पूरे देश में चर्चा का विषय है कि शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार ने किसानो पर गोली चलवा दी और 5 लोगों की जान चली गई. पहले तो पुलिस और सरकार ने किसी तरह की गोली चलाए जाने के आदेश से इनकार किया लेकिन आईजी ने बाद में माना की पुलिस ने गोली चलाई है . ये देश का दुर्भाग्य है कि जो अन्नदाता इस देश का मतदाता भी है उसके हालत पर कोई गंभीर नहीं है.गंभीरता होती तो आप खुद सोचिए की कैसे जिस राज्य के किसान सड़कों पर है उस राज्य को 3 साल लगातार कृषि रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाता रहा... डॉ. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नवंबर 2004 को 'नेशनल कमीशन ऑन फारमर्स' बना था. दो सालों में इस कमेटी ने 6 रिपोर्ट तैयार की. इन रिपोर्ट्स में तेज और समावेशी विकास की खातिर सुझाव दिए गए थे. फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले. किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज कम दामों में मुहैया कराए जाएं. गांवों में किसानों की मदद के लिए विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए. महिला किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएं. किसानों के लिए कृषि जोखिम फंड बनाया जाए, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के आने पर किसानों को मदद मिल सके. 28 फीसदी भारतीय परिवार ग़रीब रेखा से नीचे रह रहे हैं. ऐसे लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का इंतज़ाम करने की सिफारिश आयोग ने की लेकिन नतीजा क्या है आप देख सकते है. विभिन्न बैंकों से देशभर के किसान कितना कर्ज लिए, इस पर 30 सितंबर 2016 को अंतिम आंकड़ा जारी किया गया था, जिसके मुताबिक देश के 10 बड़े कर्जदार राज्यों में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है। प्रदेश के 79,08,100 किसान परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं। किसान कर्जदार परिवारों में जहां महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है, वहीं राजस्थान तीसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में चार अप्रैल को प्रदेश के 86 लाख लघु और सीमांत किसानों को कर्जमाफी का तोहफा दिया था। लेकिन सरकार के इस फैसले के दो महीना पूरा होने के बाद कर्जमाफी की आस लगाए किसानों को निराशा होने लगी है। किसानों को उम्मीद थी कि कर्जमाफी होने पर एक तरफ जहां उन्हें कर्ज से छुटकारा मिलेगा, वहीं उन्होंने कर्ज की जो एक-दो किश्त जमा की हैं, उसका पैसा वापस मिलेगा। कर्जमाफी की जानकारी लेने के लिए प्रदेशभर के किसान संबंधित बैंकों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बैंक की तरफ से उनको कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। साल 2012-13 के नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के अनुसार, पंजाब के किसानों की औसत मासिक आमदनी 18,059 रुपये थी. इसके बाद हरियाणा के किसानों का नंबर आता है. उनकी मासिक आमदनी 14, 434 रुपये थी. सबसे कम बिहार के किसानों की मासिक आमदनी थी, 3,588 रुपये. इस सर्वे के मुताबिक , भारत के किसानों की औसत मासिक आमदनी होती है, मात्र 6, 426 रुपये. मध्यप्रदेश में प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग है कि उनके फसलों के  उचित दाम तय किए जाएं, कर्ज माफ हो,मंडी शुल्क वापस हो फसलों के समर्थन मुल्य बढ़ाए जाएं...15 साल से मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार है....ऐसे में वहां के किसानों के हालात इतने बुरे है तो इसका जिम्मेदार किसे ठहराया जाए, मध्यप्रदेश के मंदसौर जहां किसानो पर गोली चलाई गई वहां के किसानों का कहना है कि कश्मीर में पत्थरबाजी करने वालों पर पैलट गल और रबर बुलेट का इस्तेमाल होता है जबकि देश के किसानों पर पुलिस सीधे गोली चलाती है, ये दोहरा मापदंड नहीं है तो क्या है...मिनीमम सपोर्ट प्राइस पर मोदी सरकार क्यों कुछ नहीं बोल रही है, ये कब तक हो पाएगा , क्या स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशे सिर्फ बाते करने के लिए ही सीमित है या फिर उसे लागू भी किया जाएगा, किसानो का आरोप है कि सरकार के पास ऐसी कोई नीति नहीं है कि वो किसानों के ज्यादा फसल का सहीं दाम दिलवा पाएं या उत्पाद कम होने पर उसकी मदद की जा सकें....तो देश के अन्नदाता के लिए खेतों में मौत की फसल उपज रही  है  ,ये वाकई डरावना है  की पहले जो पार्टी और  उसके समर्थक  किसानो के लेकर बड़ी बड़ी बातें करती थी वो सत्ता में आने के बाद क्यों भूल गए है ? क्यों अब केंद्र कद फैसलों की आलोचना नही होती जबकि असल सवाल तो ये है किसानों को लेकर इस सरकार ने कुछ भी ठोस किया है तो वो कहा है ? शिवराज सिंह चौहान  किसानों के लिए उपवास  करते है  इसका मतलब क्या है ? क्या वो अपनी गलती मानते है ?  अगर उनकी गलती है तो कार्रवाई क्यों नही होनी चाहिए ?   देश के मौजूदा माहौल में ज्यादा सवाल पूछना भी ठीक नही लगता, कब कौन आपकी देशभक्ति को सवालों के घेरे में ले आये ये कौन जानता है ?  आप खुद से पूछिए की जब कांग्रेस के वक़्त आप सवाल करते थे तो क्या आपकी देशभक्ति जांची जाती थी ? बीजेपी विपक्ष में थी तो पॉलिसी पैरालाइसिस का आरोप कांग्रेस पर लगती थी लेकिन मौजूदा बीजेपी सरकार की पॉलिसी क्या है ? विदेश मंत्री, विदेश मंत्रालय  लगातार ये कहता है कि पीएम मोदी पाकिस्तानी पीएम से नही मिलेंगे लेकिन होता ठीक उसके उलट है । 2 दिन में 2 बार मुलाकात होती है । देश मे कहा जाता है कि आतंक और क्रिकेट एक साथ नही चल सकता , पाकिस्तान जब तक आतंकियों को भेजना बन्द नही करेगा तब तक बात नही होगी । तो सवाल ये है कि पीएम ने क्यों मुलाकात की ? भारत सरकार का पाकिस्तान को लेकर स्टैंड क्या है ? आप खुद सोचिए ,क्या ये सवाल आपके मन मे नही उठते ,अगर नही तो क्यों नहीं  और अगर उठते है तो फिर इसका जवाब तलाशिए । कुल मिलाकर मेरी जो समझ है जिससे मुझे तो यही लगता है  मोदी सरकार और मनमोहन सरकार में कुछ ज्यादा अंतर नही है ।।।।

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शहाबुद्दीन कैसे बने ‘साहेब'

तो 63 मुकदमों से घिरा, गैंगस्टर होने का आरोप झेल रहा, बाहुबली का तमगा पा चुका शख्स मोहम्म्द शहाबुद्दीन भागलपुर जेल से जमानत पर रिहा हो गए लेकिन उनको जमानत मिलने मात्र से बिहार की सियासत गरमा गई है. बीजेपी ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने जानबूझ कर शहाबुद्दीन के केस में कमजोर पैरवी की है जिससे शहाबुद्दीन को जमानत मिल गई. वही सोशल मीडिया पर भी बिहार के लोगों से लेकर बिहार की सरकार तक को लोग दुत्कार रहे है लेकिन मैं आपको राजनीति नहीं बल्कि शहाबुद्दीन के बारे में कुछ अहम चीजें बताउंगा. मेरी इस लेख को पढ़कर आप ये समझ सकेंगे की क्यों बिहार के सिवान जिले में एक बड़ा तबका शहाबुद्दीन की पैरोकारी करता है.जी,तो सबसे पहले 1982-87 के दौर में चलिए जहां से शहाबुद्दीन के साहेब बनने का सफर शुरू हुआ. दरअसल शहाबुद्दीन को खुद को साहेब कहलवाने का बहुत शौक था लेकिन 1982-87 के दौर में लोग शहाबुद्दीन को शहाबुद्दीन के नाम से ही जानते थे.1980 का दौर और उससे पहले सिवान जिला कामरेडो का जिला था मतलब वामपंथियों का लेकिन शुरूआत में क्रांति जैसा मालूम होने वाला वामपंथ सिवान के लिए नासूर बन चुका था…

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