Skip to main content

Posts

Showing posts from September, 2016

इस देश में कभी पैदा न होना 'तैय्यबा'

जी, इस वीडियों को देखने के बाद अगर आपकी रुह नहीं कांपी होगी तो आप खुद कोे परखिए की क्या वाकई आपके अंदर इंसानियत  जिंदा है भी या नहीं..क्योंकि ये शब्द यूपी के मथुरा की बेटी तयैय्बा की है जो मरने से पहले इंसाफ की भीख मांग रही थी.तय्यैबा के उपर एक सिरफिरे परिवार जो उसके पड़ोस में ही रहता था उसने उसपर एसिड फेंक दिया क्योंकि तय्यैबा उससे नहीं किसी और से शादी करना चाहती थी...बहरहाल आप जब ये वीडियों देख रहे होंगे उस वक्त तय्यैबा हमारे आपके बीच तो नहीं है लेकिन इस घटना का दूसरा पहलू आप जान कर शर्मसार हो जाएंगे.जी, पीडि़त परिवार  ने यूपी के सबसे बड़े और ताकतवर नेता मुलायम सिंह के घर पर भी गुहार लगाई लेकिन वहां से भी उनके हाथ खाली रह गए...अभी तैय्यबा की जिंदगी तबाह करने वाले तीन गुनहगार फरार है और एक पुलिस की गिरफ्त में है...बड़ा सवाल है कि एसिड एटैक करने वालों के अंदर कोई खौफ क्यों नहीं है ? क्या ऐसे बेटियां महफूज रहेंगी इस मुल्क में...

शहाबुद्दीन कैसे बने ‘साहेब'

तो 63 मुकदमों से घिरा, गैंगस्टर होने का आरोप झेल रहा, बाहुबली का तमगा पा चुका शख्स मोहम्म्द शहाबुद्दीन भागलपुर जेल से जमानत पर रिहा हो गए लेकिन उनको जमानत मिलने मात्र से बिहार की सियासत गरमा गई है. बीजेपी ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने जानबूझ कर शहाबुद्दीन के केस में कमजोर पैरवी की है जिससे शहाबुद्दीन को जमानत मिल गई. वही सोशल मीडिया पर भी बिहार के लोगों से लेकर बिहार की सरकार तक को लोग दुत्कार रहे है लेकिन मैं आपको राजनीति नहीं बल्कि शहाबुद्दीन के बारे में कुछ अहम चीजें बताउंगा. मेरी इस लेख को पढ़कर आप ये समझ सकेंगे की क्यों बिहार के सिवान जिले में एक बड़ा तबका शहाबुद्दीन की पैरोकारी करता है.जी,तो सबसे पहले 1982-87 के दौर में चलिए जहां से शहाबुद्दीन के साहेब बनने का सफर शुरू हुआ. दरअसल शहाबुद्दीन को खुद को साहेब कहलवाने का बहुत शौक था लेकिन 1982-87 के दौर में लोग शहाबुद्दीन को शहाबुद्दीन के नाम से ही जानते थे.1980 का दौर और उससे पहले सिवान जिला कामरेडो का जिला था मतलब वामपंथियों का लेकिन शुरूआत में क्रांति जैसा मालूम होने वाला वामपंथ सिवान के लिए नासूर बन चुका था…