Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2016

मरने के बाद रोहित का पहला इंटरव्यू

मौत के बाद पहला इन्टरव्यू

नमस्कार, मैं ऋषिराज आज आपको एक ऐसा इन्टरव्यू पढाने जा रहा हूं जो अपने आप में नये किस्म का हैं। मैने मर चुके दलित छात्र रोहित का इन्टरव्यू किया है । ये मेरी एक कोशिश है कि एक शोषित वर्ग के छात्र को कैसी दिक्कते आयी होंगी । यहां आपको यह भी बता दूं यह इन्टरव्यू  काल्पनिक आधार पर किया गया है।इन्टरव्यू के जवाब रोहित के अंतिम पत्र पर आधारित हैं। यह सब मैने इसलिए लिख दिया क्योकी आज कल लोगो की भावनाए इतनी नाजुक और नंगी हो गयी है की कोई भी उन्हें ठेस पहुंचा देता है ।  आपको यह इन्टरव्यू पढ़ने पर बुरा लगे तो माफ किजीएगा अब वक्त आ चुका है कि हम अपनी गहरी नींद से जाग जाये। इस इन्टरव्यू के सवाल वैसे ही है जैसे आप रोजमर्रा के टेलीविजन में खोखली हो चुकी पत्रकारीता के सवाल  में देखते है ।
रिपोर्टर का सवाल – तो रोहित मरने के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?
रोहित का जवाब- जी , अच्छा और बेहद हल्का मेहसूस कर रहा हूं । अब केवल मै और मेरी आत्मा हैं । हम अब आराम से अपने मन के मुताबिक  अपने चुने हुए विषयो पर बात कर रहै है । यहा कोई और नही है जो मेरे बात करने या किसी विषय पर राय रखने …

रोहित भाई काश तुम दलित न होते!

अगर रोहित दलित नहीं होता तो शायद उसे होस्टल से नहीं निकलते । शायद उसका समाजिक बहिष्कार नहीं होता! उसके माँ बाप आज उसके शरीर से लिपट कर रो नहीं रहे होते ।
देखी तेरी रौब करारी..
ओ सरकारी..
तू तो निकली हत्यारी...

पढ़िए दलित युवक रोहित ने मरने से पहले क्या लिखा, और हम सब को सच का सामना करा गया।।

Good morning,
I would not be around when you read this letter. Don’t get angry on me. I know some of you truly cared for me, loved me and treated me very well. I have no complaints on anyone. It was always with myself I had problems. I feel a growing gap between my soul and my body. And I have become a monster. I always wanted to be a writer. A writer of science, like Carl Sagan. At last, this is the only letter I am getting to write.

I always wanted to be a writer. A writer of science, like Carl Sagan.
I loved Science, Stars, Nature, but then I loved people without knowing that people have long since divorced from nature. Our feelings are second handed. Our love is constructed. Our beliefs color…

देश को एक नहीं अनेक जल मानव चाहिए...!

जल ही जीवन है यह बात आप और हम सब बचपन से ही सुनते आ रहे है लेकिन इसके मायने को समझने के लिए हमें अपने सोच को विकसीत करने की जरूरत है। एक वक्त था जब देश के लोग नदी और तलाब की पानी पिया करते थे जिसके बाद  कुंए का निर्माण हुआ  फिर लोग चापाकल(हैंडपंप)का इस्तमाल करने लगे और आज के वक्त हम नल के पानी से लेकर बोतल बंद पानी का इस्तमाल करने लगे  है । इन सब के बीच हम इस बात का ध्यान रखना भूल गये कि हम लगातार विकास के  साथ कदमताल करने के ऐवज में अपने इलाके के नदी –तलाबो को ही खत्म कर बैठे । हमने न केवल  नदी –तलाबो को खत्म ही नहीं किया बल्कि जल की गुणवक्ता को खराब करने में पूरी भूमिका निभायी । अब हमें ऐसा वक्त भी देखने को मिल रहा है जहां पानी पर अधिकार के लिए लड़ाई तक की जा रही है।  हमारे देश में भी जल बटवारे को लेकर कई राज्यो में आपसी तकरार हैं। यही कहानी हमें विश्व के कई अन्य देशों में भी देखने को मिल रही हैं। पानी एक ऐसा आधार है जो किसी ईलाके के बसने और उजडने का मुख्य कारक होता हैं लेकिन हम इंसानी फितरत वाले लोग जो ठहरे, हमने जल संरक्षण के जगह उंची इमारतो और फैक्ट्रीयों को तरजीह दी, शहर और गां…