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Showing posts from December, 2015

देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में !

देखो ,सत्ता बिक रही है बाज़ार में ।
खरीदने वालो की संख्या है हज़ार में ।।
जो सत्ता के  दुलारे है वो खड़े है एक कतार में।।
देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में ।
दुपट्टा गिरा कर सौदा करने वाले ,मगन है पैसो की अंधकार में।।
 देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में ।
गरीबो की सोचने वालो की बस्तिया है यमुना के पार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
इन्साफ करने वाले ,गिने जाने लगे है सत्ता के यार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
नेता ,अभिनेता या हो वो न्याय रक्षक ,सब डूबे है सत्ता की खुमार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
 हम ,तुम भूखे नंगे सब ,हज़म हो जाते है एक डकार में ।।
देखो सत्ता बिक रही है बाजार में ।
 खरीदने वालो की संख्या है हज़ार में ।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।।



-ऋषि राज