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Showing posts from October, 2015

हम बिहारी शौचालय वाले !

प्रिय प्रधानमंत्री जी,
        मैं ऋषि राज पेशे से पत्रकार हूं और यह पत्र मेरे और मेरे जैसे लाखों बिहारीयों के उम्मीद की गठरी हैं। मैं यह पत्र इसलिए नहीं लिख रहा हूं कि मुझे आपसे जवाब चाहिए ब्लकि इसलिए लिख रहा हूं कि आप गरीब लोगो कि व्यथा और परेशानी बड़े अच्छे से समझ सकते है साथ ही उस कष्ट को दूर करने के लिए कोई निर्णायक कदम ले सकें । प्रधानमंत्री जी मैं पिछले 5 साल से दिल्ली में रहता हूं । उसके पहले मैं यह नहीं जानता था कि रेल इस देश में एक विकट समस्या के रूप में हम सबके सामने उभरा है। हमारे बिहार में बहुत ज्यादा अच्छी शिक्षा और रोजगार नहीं होने के कारण अपने राज्य से लगातार पलायन करके दूसरे राज्यों में जा रहे है। हालंकि बिहार बंटने के बाद मैं झारखंड की ओर आ गया था क्योकी पिताजी वहीं नौकरी कर रहें थे लेकिन अब पापा रिटायर हो चुके है और अपना पता बिहार हो चुका हैं।बहरहाल ,यह उम्मीद की गठरी आप तक इसलिए पहुंचा रहा हुं कि अब वो दर्द सहा नहीं जा रहा है और आपसे उम्मीद भी बहुत हैं । हमारे पुरे बिहार में छठ एक  ऐसा पर्व है जिसे पूरा घर मनाता है ठीक वैसे ही जैसे आपके गुजरात में नवरात्र और गरबा …

“भड़ास वाला पगला गया है”

भड़ास वाला पगला गया है यह शब्द मेरे नहीं बल्कि एक न्यूज़ चैनल में काम करने वाले मेरे मित्र के हैं। मैंने जैसे ही उनको यह बताया कि भड़ास4 मीडिया वालो ने एक अख बार के घटिया पत्रकारिता की  पीडित महीला के समर्थन में आकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक आयोजन किया है यह शब्द उनके मुख से निकल पड़े । खैर, भड़ास वालो के अंदर हिम्मत तो है इसमें कोई श़क नहीं हैं। एक अखबार की घटिया पत्रकारिता के कारण कैसे एक महिला के आत्मसम्मान को तार-तार कर दिया गया और जब उस महिला ने इस घटिया पत्रकारिता के खिलाफ शिकायत की तो उन्हें इंसाफ और माफी के जगह लगातार एक तरफ़ा रिपोर्टिंग का शिकार होना पड़ा । उस महिला के पक्ष में खड़े होकर भड़ास नें पत्रकारिता के रूतबे को गिरने से रोका भी और  प्रेस क्लब में प्रेस के खिलाफ आयोजन कर एक नया उदाहरण भी पेश कर दिया ।  मौजूदा दौर की पत्रकारिता का स्तर जितनी तेजी से गिर रहा है उसे लेकर वरिष्ठ पत्रकारों से ज्यादा नये युवा पत्रकारों को चिंतित होना चाहिए क्योकी उनका पूरा भविष्य दांव पर लगा हैं । भड़ास वालों ने इस आयोजन में मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के पुर्व न्यायधीश और  प्रेस काउंसिल ऑ…

आत्मघाती : द सपोर्टर

मुझे मालूम है कि आप आत्मघाती शब्द सुन कर थोड़े घबरा से गये होंगे लेकिन मेरा मकसद आपको परेशान करने का बिल्कुल भी नहीं है। मैने इस शब्द को सोच समझ कर ईस्तमाल किया है । आज के मौजूदा दौर में कोई भी राजनीतिक दल हो आपको सोशल मीडिया पर उनके समर्थक दिख जाएंगे । वो हर तरह से अपने  पसंदीदा पार्टी का समर्थन करते है और साथ ही केवल और केवल उनके दिमाग में अपनी पार्टी के तारिफ के अलावा कुछ भी नहीं होता है । अगर आप इनके पसंदीदा पार्टी के विरोध में कुछ लिख दे तो ये जी-जान से उसके बचाव में और आपके खिलाफ गोलबंद हो जाते हैं। ये सही-गलत नहीं केवल अपने पार्टी का हीत देखते है । उनके लिए देश की उन्नती, लाभ ये ज्यादा जरूरी पार्टी के पक्ष को मजबूत करना है  इसलिए मैने ऐसे लोगो के लिए आत्मघाती शब्द का उपयोग है । हो सकता है कि मेरे विचार से आपका मत अलग हो लेकिन मैं आप पर आपके विचार बदलने का दबाव तो नही बना सकता लेकिन हम तर्क कर सकते है अगर वह त्थय पर आधारित हो।
ये जो सोशल मीडिया पर या वास्तविक दुनिया में किसी दल के समर्थक होते है वो सबकुछ भूल कर केवल अपने तर्क को मजबूत करते है चाहे उन्हें कुतर्क का ही सहारा लेना…