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Showing posts from July, 2015

डिजीटल हो जाने पर सवालों का सायां

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंदिरा गांधी इन्डॉर स्टेडियम में  डिजीटल इंडिया मिशन लॉन्च कर दिया। डिजीटल इंडिया का अर्थ है पूरे भारत को इंटरनेट से जोड़ देना, अधिकतम काम को ऑन लाइन कर देना तथा प्रत्येक व्यक्ति तक ऑन लाईन सेवा की पहुंच। 125 करोड़ देश में यह अंग्रेजी में जिसे हर्क्युलियन टास्क कहते हैं वही होगा।
प्रधानमंत्री के चुनावी वायदों में यह शामिल था। अपने एक वर्ष के कार्यकाल में वे कई बार अपने डिजीटल इंडिया सपने पर जो बातें करते रहे हैं उनसे कई बातें स्पष्ट होतीं हैं। मसलन, वे चाहते हैं कि भारत का कोई भी गांव ऐसा न रहे जहां की इंटरनेट की पहुंच न हो और आवश्यक ऑन लाईन सेवा वहां उपलब्ध न हो। गांव के किसान भी अपना सामान बेचने के लिए ऑन लाइन कृषि बाजार पर मूल्य देखें, अपने सामानों की उपलब्धता बताएं और खरीदार आकर उनका सामान खरीदकर ले जाएं। निश्चय ही यह सुनने में सपना ही लगता है। ऐसा लगता है जैसे यह हकीकत नहीं, सोते समय आने वाला सुनहरा ख्वाब हो।
प्रधानमंत्री  मोदी के डिजीटल इंडिया के नौ मुख्य बिंदु है दृ
1. ब्रॉडबैंड हाइवे - सड़क हाइवे की तर्ज पर ब्रॉडबैंड हाइवे से शहरों को जोड़ा जाएगा.
2. सभी…

छत्तीसगढ़ के सिस्टम को पोलियो हो गया हैं...आप देखिये तस्वीर और दया दिखाईये...

पहली चार तस्वीरे उन 4 शहीद पुलिस वालों का है जो सिस्टम की भेंट चढ़ गये... जब उनकी लाश सड़क पर पड़ी हुई थी तो (पिछले ब्लॉग में तस्वीरे उपलब्ध हैं) पुलिस को लाश उठाने में 3 घंटे कावक्त लगा और कुत्ते उनकी लाश को तब तक चाट रहे था... जिसके बाद उन लोगो को श्रद्धांजली दी गयी....




अब इन तस्वीरो को देखिये ... पहले पिताजी  बताते थे की पढ़ने के लिए उन लोगों को नदी पार करके जाना पड़ता था लोकिन वो दौर दूसरा था उस वक्त भारत को नयी -नयी आजादी मिली थी लेकिन आज के वक्त में सिस्टम का ये हाल... बच्चो को  स्कूल  जाने के लिए कितनी मुसीबत उठानी पड़ रही  है... मामला समझा जा सकता है कि हमारे देश के सिस्टम से अबतक पोलियो खत्म नहीं हुआ हैं... 


 पानी बहती पुल से जब पानी निकल गया तो देखीये ये गढ़ा ...इसमें आये दिन लोग गिरते है और घायल होते है.. हमारा सिस्टम खुद गढ़े में है तो क्या हम गढ़े में एक बार गिर नहीं सकते...?
टूटी हुई पुलिया की तस्वीर गरियाबंद इलाके  की हैं।  ये तमाम तस्वीरे छत्तीसगढ़ राज्य की हैं...

छत्तीसगढ़ के खूनी खेल में शहीद सिपाही...क्योकी सिस्टम तो पोलियोग्रस्त हैं ।

13 जुलाई को शाम में अपहरण किये गये 4 पुलिस वालो को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार कर उनके सिस्टम को  चैलेंज किया है... अपहरण होने के बाद पुलिस रात भर कुछ नहीं कर पायी..कल सुबह से सर्च आपरेशन शुरू किया गया था और अब पुलिस वालों ने अपने साथियो के लाथ को दुढ़ने में सफलता हासिल कर ली हैं। पता नहीं नेताओं के शर्म कब आयेगी...इनका अपहरण  बीजापुर के कटरू और फसेडगढ़ के बीच किया गया था...








ए भैया व्यापमं....

ए भैया व्यापम ,तुम इतने व्यपाक क्यों हो ,
अक्षय जानना चाहते थे की तुम इतने घातक क्यों हो!
रोज नये खुलासे किये जा रहे थे ,
अक्षय द्वारा भी यही तथ्य तलाशे जा रहे थे !
भोपाल से लेकर ग्वालियर तक तुम्हारे तार जुड़े थे,
अक्षय भाई उन कड़ियों को जोड़ने के लिए खड़े थे !
एक -एक कर के सारे अहम लोग मारे जा रहे ,
अक्षय द्वारा सारे दस्तावेज जुगाड़े जा रहे थे !
झाबुआ में कुछ लोग अहम सुराग छुपाते जा रहे थे ,
अक्षय भाई अपने स्तर पर वो सुराग जुटाते जा रहे थे!
इसी बीच उन हत्यारों का पूरा तंत्र हिल गया था ,
अक्षय भाई लगता है आपको कुछ बेहद अहम मिल गया था !
हत्यारों ने एक घातक षड्यंत्र बना लिया,
अक्षय भाई उन्होंने आपका वजूद मिटा दिया !
आपके लिए न्याय की बात करते नेताओं के दिल बड़े काले थे,
अक्षय भाई आज आप नहीं है लेकिन इतना कहूँगा की आप बड़े जिगरा वाले थे ।







सच्चर कमेटी के उस पार....

भारत में अक्सर मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक हालत को लेकर बहस होती है. मुसलमानों की आर्थिक हालत को जानने के लिए बनी सच्चर कमेटी ने भी मुसलमानों के पिछड़ेपन का जिक्र किया था.जिसके बाद समय - समय पर  सच्चर कमेटी  की रिपोर्ट राजनीति में वोट बैंक के तौर पर इस्तमाल की जाती रही हैं।  सच्चर कमेटी ने अपने रिपोर्ट में यह बताया था की देश के मुसलमानों के हालत बेहद खराब हW।




दूसरे तरफ मुसलमानों की सरकारी तंत्र के उच्च पदों या अहम विभागों में भागीदारी नाम मात्र के लिए हैं ।सुरक्षा एंजेसी रॉ और आईबी में मुसलमानों की नियुक्ति ही नहीं होती । हांलकि ऐसा कभी किसी सरकार द्बारा घोषित रूप से कुछ कहा नहीं गया है लेकिन फिर भी मुसलमानों की भागीदारी ना होने पर ये सवाल लगातार उठते रहें कि देश की सरकार अपने ही देश के एक समुदाय के प्रति इतना असुरक्षित क्यों महसूस करती हैं। बहरहाल हम इस लेख में मुसलमानों के उनके ही मुल्क में बिगड़ते और हद से ज्यादा बदत्तर होते हालत के बारे में बात करने जा रहें हैं।
  सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में कुल अनुशंसाएं ध्सुझाव  76
 सरकार द्वारा 72 अनुशंसाएं स्वीकृत
 3 अनुशंसाएं स्वीकृत नहीं की गई…

अगर धोनी को हटाओगे तो धोनी जैसा कहां से लाओगे...?

जब आत्मविश्वास डगमगाने लगे तो सामने घुप्प अंधेरा छा जाता है. जब पिच पर क्रोध में खिलाडी को धक्का देने लगे तो संयम की परीक्षा शुरू हो जाती है. जब लगातार हार मिल रही है तो कप्तान के काबलियत पर सवाल शुरू हो जाते हैं. जब मैच के बीच में कप्तानी छोड़ने की बात होती है तो ये सवाल शुरू हो जाते है कि वो कैप्टन कूल नहीं रहे. जब क्रिक्रेट में राजनीति शुरू हो जाए तो जीत पर असर पड़ता है. जब कप्तान को नीचा दिखाने की कोशिश होता है तो जाहिर है कि कप्तान का आत्मविश्वास हिलने लगता है. इन्हीं सारे सवाले के बीच कैप्टन महेन्द्र सिंह धोनी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. चाहे क्रिकेट में जीत का मामला है या असल जिंदगी में सफलता का मामला है आत्मविश्वास सातवें आसमान पर चढ़ जाता है लेकिन हार से आत्मविश्वास गर्त में पहुंचने लगता है. जिंदगी की हकीकत है कि ऐसे निराशा का माहौल हर शख्स की जिंदगी में आता है जो इसमें फंस जाता है वो टूट जाता है और उबर जाता है फिर वो जीत जाता है. जी हां महेन्द्र सिंह धोनी आजकल क्रिक्रेट के मझधार में हिचकोले खा रहें हैं और चारों तरफ से ये आवाज आ रही है कि क्रिक्रेट में धोनी का समय अस्त होने…

इतने से काम नहीं चलता और चाहिए....

लोग अक्सर बापू से एक सवाल करते थे कि आप एक ही धोती को पहनते भी हैं और आधा ओढ़ते भी है ,ऐसा क्यों?  बापू इस बात का जवाब बड़ी सहजता से देते हुए कहते थे कि “मैं वो पहनता हूं जो मेरे देश का न्यूनतम वर्ग का नागरिक आसानी से पहन सकें।“ जी, लेकिन अब बदलते वक्त के साथ हमारे देश के नेताओं के विचार भी बदलने लगे हैं। सभी नेताओं के जुबान से आज भी गांधी जी के आर्दशों के बारे में अक्सर सुनने को मिल जाता है लेकिन वो खुद बापू के विचारों को अपने जीवन में कितना उतारते है यह तो आपके सामने ही हैं। हमारे देश में वीवीआईपी कल्चर कुछ इस कदर बढ़ चुका हंै कि एक बच्ची घंटो जाम में फंस कर जान से हाथ धो बैठती है क्योंकि नेताजी के स्वागत में इतने समर्थक आ गये कि दो घंटे तक शहर जाम हो गया । उस बच्ची को तत्काल ईलाज की जरूरत थी लेकिन उस बच्ची के मां-बाप अपनी फूटी किसमत पर रोते रह गये । इन दिनों टीवी , रेडीयो पर सरकार समर्थवान लोगों से गैस की सब्सीडी त्यागने का आवेदन कर रही हैं लेकिन  देश के माननीय सांसद ,उनके रिशतेदार और संसद भवन में काम करने वाले सरकारी लोग खुद संसद भवन में सब्सीडी वाली लजीज व्यंजन का मजा लेते दिख जा…

योग करके देखो अच्छा लगता हैं।

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दुनिया के किसी देश का कोई प्रस्ताव इस तरह स्वीकार हो और उसका ऐसे अनूठे तरीके से साकार होने की शुरुआत हो तो वह गर्व से सीना फुलाकर चलेगा। पूरे देश में एक आत्मसंतोष का भाव होगा। गर्व का अर्थ घमण्ड या बड़प्पन का भाव नहीं होता। इसका यह अर्थ भी नहीं होता कि हम स्वयं को अन्यों से विशिष्ट या श्रेष्ठतर मान रहे हैं। यह तो विश्व के कल्याण में, मानव समुदाय के हित में और विस्तारित करें तो प्रकृति और ब्रह्माण्ड के साथ मनुष्य को एकाकार कराने में अपनी विद्या के प्रयोग की विनम्र आत्मसंतुष्टि है। पर हम इसका खुलकर श्रेय नहीं ले सकते। ऐसा करने वाले को फुहर या अतिवादी या फिर फासीवादी तक करार दे दिया जाएगा। विचित्र स्थिति है।
अगर संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून की मानें तो यमन को छोड़कर 192 देशों के लोगों ने योगाभ्यास में हिस्सा लिया जिनकी संख्या 2 अरब के आसपास जा सकती है। हमारे देश के प्रस्ताव पर योग दिवस के दिन दुनिया भर के 252 से ज्यादा शहरों में इतने ज्यादा लोगों ने योग किया। इनमें गांव, कस्बे आदि शामिल नहीं हैं। यह ऐसा रिकॉर्ड है जो शायद ही कभी टूटे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहां कि …