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Showing posts from June, 2015

पत्रकार या तो बने दलाल वरना हो हलाल !

देश के अलग -अलग हिस्सों से यह खबर हमेशा सुनने को मिलती है कि फ़ला अखबार का फ़ला पत्रकार की हत्या हो गई या कुछ लोगों ने की पत्रकार की पिटाई । जी, हम ऐसा सुनने के आदि हो गये है जिस वजह से उस पिटे हुए या मार दिए गए पत्रकार को खबरों में ना तो जगह दिला पाते हंै और नाहि न्याय । यह त्रासदी आज की नहीं हैं देश के इतिहास के साथ ही बढ़ती चली आ रही हैं।  इस लेख को लिखने का कारण भी यहीं हैं कि अब पत्रकारों पर हो रहे हमले नाकाबिले बर्दाशत हो चलें हंै ।  लंदन के एक मीडिया इंस्टीटूयट के अनुसार विश्व भर में पत्रकारों के लिए चैथा सबसे खतरनाक देश भारत माना गया हैं । साल 2013 में  भारत में 11 पत्रकारांे को मौत के घाट उतार दिया जाता हैं तो वहीं साल 2014 में विश्व भर में 61 पत्रकारों की जान ले ली जाती हैं । ये बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं कि जनता के हित के लिए खबरनवीश का काम करने वाला आदमी उसी समाज के किसी वर्ग द्वारा मार दिया जाता हैं । बात मुंबई हमले की हो या करागिल की पत्रकार सबकुछ दांव पर लगाकर रिपोर्टिंग करता है । हाल की ही बात करें तो छत्तीसगढ़ से लेकर उत्तर प्रदेश तक पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं लेकि…