Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2015

नक्सली कैसे लेते हैं हैलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग पार्ट -2

इस वीडियो में देखिये की कैसे नक्सली किसी विमान को उड़ाने की तैयारी कर रहे है। सरकार अब भी कहती है कि ये हमारे अपने है तो सवाल से है कि ये जिनपर गोली चलाते है वो कौन है हमारे । हमने यमन से 4000 भारतीय लोगों को बिना खरोच लगे  निकाल लाये... 26 देशों को मदद कर रहे है लेकिन हम अपने सपूतों के लाश पर केवल फूल चढ़ाते है आखिर क्यों ...इनकी जान इतनी सस्ती है ।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का विधानसभा ड्रामा

कांग्रेसी कुछ भी अच्छे से नहीं कर सकते ...धरना भी देते है तो 5 मिनट वाला...देखिये वीडियों ब्लाग

मीडिया कुछ घंटों में जहां पहुचा वहां प्रशासन को लगे थे 28 घंटे

जहां मीडिया कुछ घंटो में पहुंच गयी वहां प्रशासन को पहुंचने में 28 घंटे लगते है. क्या यह शर्म की बात नहीं है. हम यमन से 4000 लोगों  को निकाल लाते हैं, 26 देशों को मदद पहुंचाते हैं लेकिन अपने देश में अपने सिपाहियों  को केवल श्रर्धानंजली देते है ।

आखिर नक्सलीयों से निपटने का रास्ता क्या हैं !

लिखते .  लिखते हमारे कलम की स्याही फिकी पड़ सकती है लेकिन नक्सलवादियों द्वारा दिए जा रहे घटनाओं को अंजाम गहरी और गहरी होती चली जा रही हैं। जी, आज के वक्त में देश के भीतर अगर खतरे की सुगबूगाहट से ऊपर उठ कर कोई देश के लिए खतरा हो चला है तो वो नक्सलवाद ही हैं ।पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौर में नक्सलवादियों को खत्म करने के लिए ग्रीनहंट आॅपरेशन चला और उस आॅपरेशन ने नक्सलवाद को बहुत हद तक बांध दिया लेकिन बीतते समय के साथ यह ऑपरेशन भी ठंडा होता चला गया है । ये त्रासदी यहीं से शुरू हुई जब सरकार लाचार दिखने लगी और महज सेंकड़ों की संख्या वाले नक्सली दमनकारी होते चले गये ।कुछ महीनों के अंतराल पर ये लगातार कोई ना कोई बड़े साजिश को अंजाम देने में सफल हो जाते है चाहे रेलवे की पटरी उड़ानी हो या फिर जाल बिछा कर केन्द्रीय सुरक्षा बल के जवानों के ऊपर हमला करना हो ये हमला करते और फिर भाग निकलते है । आप आंकड़े उठा कर देख लीजिए दिल दहलने की जिम्मेदारी हम लेते है । 15 फरवरी 2010 को बंगाल में नक्सलीयों ने सीआरपीएफ के कैंप पर हमला कर 25 जवानों की हत्या कर दी, तो महज 50 दिनों बाद ही 6 अप्रील 2010 में…

बिखर रही है झाडू, मफलरमैन की हर कोशिश नाकाम

देश में जब आंन्दोलन हुआ ,लोग एक के साथ एक जुड़ते चले गये तब किसी ने भी सोचा ना था कि अन्ना के प्रिय शिष्य केजरीवाल उर्फ मौजूदा दौर में दिल्ली के सीएम और मफलरमैन देश में अपनी पार्टी खड़ी करने जा रहे है । खैर,पार्टी बनी और महज कुछ महीनों में जादूई तरीके से पार्टी ने दिल्ली चुनाव में मैदान मार लिया ,49 दिनों तक सत्ता में रह कर लोकपाल के मसले पर इस्तीफा दे दिया , लोकसभा चुनाव लड़ा ,बुरी हार हुई ,पार्टी टूटती चली गयी फिर से दिल्ली चुनाव में ऐसी जीत जिसने मोदी जैसे नेता को हरा कर 70 में से 67 सीटों पर कब्जा कर लिया और फिर पार्टी के बुरे दिन शुरू हुए । दुबारा सत्ता में आये केजरीवाल को कुछ दिन ही हुए थे कि पार्टी के अंदर चल रहीं लड़ाई पूरे देश के सामने आ गयी। पहले केजरीवाल का स्टिंग सामने आया जिसमें वो कांग्रेस के 6 मुसलमान विधायकों को तोड़ने की बात कह रहे थे, फिर योगन्द्र यादव, प्रंशात भूषण और केजरीवाल गुट का आर-पार की लड़ाई का ऐलान होना । जिस नेता ने पार्टी के अंदर वैचारिक ढ़ाचा खड़ा किया और जिसने रात–रात भर बैठ कर पार्टी का संविधान लिखा, वो दोनो ही पार्टी के पार्दशिता पर सवाल खड़े कर रहे ह…