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Showing posts from February, 2015

आखिर जीत तो मोदी और शाह के सियासत की हुई है ...कोई शक!

जी, जीते तो मोदी और शाह ही है कोई शक हो तो दूर कर लीजिये । आप ये सोच रहे होंगे की जिस पार्टी ने 67 सीट जीती मै उसे विजेता ना मानकर 3 सीट जितने वाली पार्टी को जीता हुआ क्यों कह रहा हूँ ! गौर कीजियेगा तो सियासत में मोदी और शाह ने एक बार फिर जीत दर्ज की है जिसमे इमानदारो की राजनीति हार गयी है ! केजरीवाल जब बनारस से लौटे तो टूटे और बिखरे हुए ,मानो की सियासत उनको खड़ा रहने तक के लिए 2 धूर जमीन तक देना नही चाह रही हो । लेकिन इसको साफगोई कहिये या फिर नई राजनीति जहा केजरीवाल ने घर घर का दरवाजा खटखटा कर माफ़ी के साथ वोट माँगा और जनता का गुस्सा प्यार में तबदील हो गया । बीजेपी अपने हनीमून के दौर में थी जहा केजरी उसको केवल हारा हुआ वजीर के तौर पर दिख रहा था और यही सबसे बड़ी चुक हो गयी । मौका हाथ से निकलता देख मोदी और शाह की जोड़ी ने एक और दाव बिछाया जिसमे एक क्रांतिकारी नेता के सामने उसी आन्दोलन के गर्भ में बड़ी होने वाली बेदी को सामने ला कर खड़ा कर दिया । मतलब साफ़ था की एक इमानदार के सामने दूसरा इमानदार और इन इमानदारो में से जो भी जीते हारेगी ईमानदारी ही और दारू ,जात-पात, धर्म की सियासत बची रहे और मा…