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Showing posts from January, 2015

राजनीति, पत्रकारिता, दिल्ली चुनाव और दामन पर दाग !

हमारे देश में चुनाव एक पर्व की तरह मनाये जाते है । नेता मेला लगाते है और जनता मेला घुम कर लोकतंत्र का मज़ा लेती है ।जी ,मजा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि आज के दौर में चुनाव हो तो बड़े स्तर पर रहे है लेकिन वोट देने वाले सेल्फिबाज वोटर मुद्दों से ज्यादा चेहरों और टीवी में बार-बार आने वाले चेहरों को ही अपना नायक मानकर वोट देना । मौजूदा हालत देश में ऐसे बनते जा रहे है जैसे आप जितने देर टीवी पर दिख रहे है उसी हिसाब से पार्टी आपको पद और जनता अपना मत तय कर दे रही है । यही दुर्भाग्य भी है कि24 घंटे वाले लगभग तमाम चैनल अपने आप को सवालों के घेरे में खड़ा करते चले जा रहे है । पहले खबर को ब्रेक करने वाला बड़ा और अच्छा पत्रकार होता था लेकिन अब खबरों को किसी मुनाफे और घाटे के बीच से किसी एक राजनीतिक दल को फायदा पहुचाने वाला बड़ा पत्रकार कहलाता है । मसला कोई भी हो हम तमाम लोग चाहे नेता ,पत्रकार या फिर आम जनता सभी लोग कुंठा से भर चुके है ,कोई किसी के खिलाफ कह दे तो वो जिसके खिलाफ कह रहा है उसकी ओर से दलाल घोषित हो जाता है , कभी किसी के नेता के खिलाफ कह दीजिये तो जनता आपको दलाल कहने से हिचक नही रही है । नेत…

सह -मात और बीजेपी का प्रपंच!

वो बीते दिनों की बात हो चुकी है जब नीतियों के आधार पर सियासत के हुक्मरान राज करते थे और मौजूदा दौर में राज करने के लिए नीति बनाई जाती है । इसका जिक्र इसलिए क्योकि राजनीति में इनदिनो बीजेपी अपने चरम पर है और ऐसे ही कई और छलांग लगा कर एक नई ऊचाई पर पहुचने की कोशिश जारी है । बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 सीटों पर समेट दिया । लोकसभा के नतीजो के बाद गुजरात की जोड़ी यानि मोदी और साह ने अपनी दस्तक का अहसास दिल्ली और संघ को बखूबी करा दिया । मोदी पीएम बने और साह बीजेपी के मुखिया । फिर यही से शुरु हुआ सह और मात का खेल ,गौर करे तो सह और मात का खेल इस जोड़ी ने लोकसभा के चुनाव के वक़्त ही शुरु कर दिया था । बीजेपी ने चुनाव में जाने से पहले कई लोगो को तोडा और अपने पार्टी में शामिल किया । कुल 120 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट मिले जो इधर उधर से लाये हुए थे । माहौल कांग्रेस के खिलाफ बनती गयी और बीजेपी बड़ी पार्टी का आकार लेती गयी । ये बीजेपी का सह और मात का खेल ही था जिसने कांग्रेस को कांग्रेस के खिलाफ ही खड़ा कर दिया ,पार्टी छोड़ते नेताओ क…

सेक्स...उफ्फ्फ...ये हिचक कैसी ?

सेक्स, क्यों नाम सुनते ही शरीर में सिहरन सी पैदा होने लगी ।अरे शर्माइये नहीं जनाब पूरा लेख पढ़िए और सेक्स में होने वाले रोमांच से ज्यादा सेक्स को समझने की कोशिश कीजिये ,यकीन मानिये जिन्दगी खूबसूरत हो जाएगी । तो सबसे पहले आप अपने अगल बगल झाक कर ये देखना बंद कीजिये की कही सेक्स के बारे में पढ़ते हुए कोई आपको देख तो नही रहा है उससे पहले आप अपने अंतर्मन ये सवाल कीजिये कि जिस प्रक्रिया से आपका प्रजनन हुआ वो छुपाने और झिझक पैदा करने वाला कैसे हो सकता है ? आप बात तक नही करना चाहते इस मसले पर तो बदलते वक़्त का स्वागत कैसे करेंगे ? सेक्स एक कला है ,जो अजन्ता -एलोरा की मूर्तिय चीख-चीख कर यही तो कहती है लेकिन हम संस्कृति का तमगा लेकर इस मुद्दे को कभी आगे बढने नहीं देते ,सेक्स करते है छुप-छुप कर, सेक्स देखते है छुप-छुप कर ,बाते वो नाम ही मत लो भाई साहब !सेक्स की बात लड़का -लड़की से बात नही कर सकता ,कोई किसी को सेक्स के बारे में ठीक -ठीक समझा भी नहीं सकता । बात करिए तो धीरे-धीरे ताकि कोई सुन ना ले । अब सेक्स के अहम पहलु पर बात करते है जिसके हिस्से में कई सवाल है जैसे अगर सेक्स आपत्ति जनक नही है तो म…

सियासत..केजरीवाल..और हम लोग !

कौन जीतेगा ,कौन हारेगा ,कैसे किसी दुसरे दल को छोटा दिखा कर अपना कद बड़ा कर लिया जाये ,इन सब माथापच्ची के बीच एक बड़ा सवाल ये की क्या केजरीवाल भी हार जायेंगे ? जी, इस सियासत के बीच केजरीवाल एक ऐसे पहलु है जिसे देश के प्रधानमंत्री से लेकर ,दूसरे दल के नेता, उम्मीदवार, निर्दलीय प्रत्याशी ,वोट डालने वाली जनता, मीडिया और सोशल मीडिया कोई भी नकार नही सकता या यू कहिये की दिल्ली की सियासत बिना केजरीवाल के पूरी ही नहीं हो सकती । अब बात केजरीवाल पर लगने वाले आरोपों की करे तो केजरीवाल के दामन में कई दाग दिखते है लेकिन महज सियासी जो किसी रूप में उनको नुकसान नहीं पंहुचा सकते । बात दिल्ली के 49 दिनों के सरकार से शुरू करे तो केजरीवाल को भगोड़ा और सत्ता का लोभी कहा गया लेकिन देखा जाये तो सत्ता की ललक अगर केजरीवाल में रहती तो वो कतई दिल्ली की गद्दी छोड़ बनारस मोदी को सीधा टक्कर देने नही पहुचते । केजरीवाल का सीधा और सटीक मकसद जनता को उस सिस्टम का स्वाद चखाना था जिसमे जनता मालिक और नेता जवाबदेह होता है लेकिन कही ना कही मोदी के सामने कोई करिश्माई चेहरा ना पेश कर पाना और बीजेपी के मुकाबले मीडिया और मार्…

लाख कोशिशो के बाद...

लाख कोशिशो के बाद हम मिल नही पाए , तुमने कहा था दोगी मेरा साथ, अपने हाथो में रखकर मेरा हाथ, दोहराती थी तुम हर बात पर ये बात लेकिन, लाख कोशिशो के बाद हम मिल नही पाए । गुटरगू करते मोहब्बत का मज़ा भी खूब लिया, कभी चोकलेट तो कभी टीशर्ट गिफ्ट दिया , मैंने भी तुझको पाने के लिए 2 और 2 एक किया , लेकिन लाख कोशिशो के बाद हम मिल नही पाए । कभी मोटरसाइकिल पर तो कभी कार में घुमाया, कभी डिजनीलैंड तो कभी तुझको मैंने पीके भी दिखाया , बात -बात पर तेरे नखरे को सर पर बिठाया लेकिन, लाख कोशिशो के बाद हम मिल नही पाए । अपने कोशिशो को देख तो मेरे आंख भर आये , लाख रूपये तो तेरे घरवालो को खुश करने में उडाये , तेरे मोहब्बत के खातिर हम आज भी कुर्बान हो जाये लेकिन , लाख कोशिशो के बाद हम मिल नही पाए । -ऋषि राज े

दिल्ली की सर्दी और चुनावी गर्मी

तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…

दिल्ली की सर्दी और चुनावी गर्मी

तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…

दिल्ली की सर्दी और चुनावी गर्मी

तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…
तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…
तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…
तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो क…