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जनतंत्र के 'लूट' का मॉडल है झारखंड !

झारखंड को बने 17 साल होने को है लेकिन झारखंड के हाथ की लकीरें अब तक नही खिंची है . ऐसा लगता है जैसे मानो अभी झारखंड की किस्मत लिखा जाना हो । लेकिन बीते सालों की कहानी देखी जाए तो ये जरूर कहा जा सकता है कि झारखंड को बना कर  भी बनाया नही गया ।  यूं देखा जाए तो राज्य पर सबसे ज्यादा बार राज बीजेपी को मिला, खनिज संपदाओं से भरे राज्य में विकास की गाड़ी अब तक दौड़ नही पायी है ।  सरकारें दूसरे दलों की भी बनी लेकिन हर किसी ने राज्य के विकास के जहग खुद के विकास पर ही जोर दिया मसलन राज्य आज भी बिखरा हुआ है और संगठित महज वो लोग है जो इस राज्य पर राज कर रहे है । बात शिबू सोरेन की हो, या बाबूलाल मरांडी की राज्य ने इन नेताओं पर जनता ने  अपना खूब भरोसा जताया लेकिन ये भी कुछ खास नजर नही आए। शिबू सोरेन की भूमिका तो राज्य को बनाने में रही लेकिन वो भी पार्टी और बेटे से इधर उधर देख न सके और रोज झारखंड पिछड़ता चला गया ।  मौजूद दौर में राज्य में बीजेपी की सरकार है , बीजेपी को इस बार लगभग जनता ने पूर्ण बहुमत के करीब पहुँचाया लेकिन बीजेपी की सरकार में भी भारी निराशा देखने को मिल रही है,हालांकि सरकार ऐसा नही मा…
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कहीं देश को तानाशाह किम जोंग से प्यार तो नही हो गया ?

लोकतंत्र है क्या बता सकते हो ? अमा यार छोड़ों तुम का बताओगे, तुम खुद ही नहीं समझ पा रहे हो की तुमको लोकतंत्र से मोहब्बत है या फिर फांसीवाद पर तुम्हारा लस्ट है ? जब पता चल जाएं तो बता देना वैसे उम्मीद नहीं है हमको की तुम लोग कन्विंस भी होते हो ?  हरियाणा वाला बाबा से हर पार्टी सत्ता के लिए डील तो बारी बारी कर लिया, जिसका नतीजा हुआ न्यायपालिका के आदेश के बाद पब्लिक बौरा गई, गाड़ी जलाई, बिल्डिंग जलाई, मीडिया वालो को मारा और फिर खुद 38 आदमी निपट गया. हालातों ने बताया की सरकार पूरा फेल हो गई है लेकिन सरकार का समर्थक लोग पूरा ढीठ पना दिखाया, उसके पहले हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष का बेटा भी बेटी उठाओ मुहिम में पकड़ाया तो लड़की के करेक्टर परसमर्थक लोग लोटा ले के चढ़ गए. खैर इन सब मामलों के बाद बारी आई गौरी लंकेश की, उसके मारे जाने पर हंगामा इसलिए हुआ क्योंकि कन्नड़ में उन्हें पढ़ा जाता था जिसके वजह से लोग डरे हुए थे कि वो एक्सपोज हो जाएंगे, गौरी लंकेश को किसने मारा ये तो बाद में पता लगेगा लेकिन जो लोग उनकी हत्या को जायज ठहरा रहे थे उनको देखकर मन तो खिन्न हो गया. बताईये महाराज कोई किसी महिला को कु…

गोरखपुर हादसे ने योगी की नीयत को एक्सपोज़ किया है ?

तो बच्चो की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई ये ऐलान यूपी के सर्वे सर्वा, गोरखनाथ मठ के महंत और यूपी के सीएम मंहत योगी आदित्यनाथ ने कर दिया...ऐसे में फिर एक योगी की बात को समाज जस का तस स्वीकार करेगा या खारिज कर देगा ये बड़ा सवाल है ... महज चंद घंटो में 36 बच्चों की मौत हुई लेकिन राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार ने इस बात को खारिज कर दिया , वो अलग बात है कि आरोपों के  खारिज होने के बाद भी सरकार जांच की दरियादिली दिखा रही है लेकिन सवाल है कि जब मौते समान्य है तो फिर जांच किस बात का करवाएगी. वैसे भी स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने तो साफ साफ कह ही दिया है कि अगस्त में बच्चो की मौत तो होती ही है... 10 अगस्त को अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट चलाने वाले कर्मचारियों ने सीएमओ को लिखा कि आक्सीजन का स्टॉक खतरनाक रूप से कम हो चुका है और रात तक के लिए भी नहीं बचा है. ऑपरेटर ने अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई कि जल्दी कीजिए मरीज़ों की ज़िंदगी ख़तरे में है. यह दूसरा पत्र था. एक हफ्ता पहले भी ऐसा ही पत्र लिखा जा चुका था जिसका कोई जवाब उन्हें नहीं मिला.  जिस अस्पताल का दौरा राज्य के मुख्यमंत्री एक महीने …

भ्रष्टाचार का ‘सैंपल’ लालू ही क्यों ?

जिस एजेंसी के पिछले दो डॉयरेक्टर खुद कानून के उलंघन के दायरे में आ गए हो और तो और जिस एजेंसी को तोता कह दिया गया हो उस एजेंसी से ये कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वो पूरी निष्ठा और निष्पक्षता के साथ काम कर रही होगी.जाहिर है लालू यादव को निचली आदालत ने चारा घोटाले में साजिशकर्ता मानते हुए सजा सुनाई और उन्हे जेल भी जाना पड़ा.लालू कोई छोटे मोटे नेता है नहीं लालू का अपना एक औरा है जिसके सामने तो कई बार भारतीय राजनीति बौनी पड़ती दिखाई दे चुकी है. बात आडवानी के रथ रोकने की हो या फिर महागठबंधन के अचूक फॉर्मूले की. जब पूरे देश में मोदी नाम की लहर थी उसवक्त बिहार में मोदी को मुंह की खानी पड़ी तो जाहिर है की राजनीतिक तल्खियां बढ़नी थी. मौजूदा हाल में देखा जाए तो लालू पर उसी तोते ने ये आऱोप लगाया है कि साल 2006 में लालू ने irctc के टेंडर में घालमेल किया औऱ जिन लोगों को टेंडर मिला उनसे बदले में जमीन ले ली गई. 2004 से शुरू होती है कहानी ! आईआरसीटीसी के गठन के बाद साल 2004 में ये तय किया गया कि रांची और पुरी स्थित रेलवे के होटल बीएनआर का संचालन भारतीय रेलवे से लेकर आईआरसीटीसी को दे दिया जाएगा. इसके ठीक…

जब जिंदगी ने यू टर्न ले ली......

वो शाम कुछ अजीब सी थी, दिल को लग रहा था कि कुछ तो अलग है लेकिन क्या ये जानने के लिए दिल बेचैन था, खिड़कियों से कभी झांकते तो कभी बालकनी में आना जाना कर रह था, मन नही लगा तो नीचे मार्केट में चला गया, सिगरेट की डिब्बी ली और चल पड़ा, कुछ समझ नही आ रहा था तो सोचा कि कुछ दूर पैदल चल लू, कुछ दूर ही आगे गया था, की सिगरेट जलाने की तलब हुई, सिगरेट जलाने ही वाला था की एक आवाज आई, कि  रोहन तुम और सिगरेट , ये कब से शुरू किया तुमने, उसकी आवाज से ही मुझे इल्म हो गया था कि ये गुंजन है , जिसने इतने अधिकार से मुझसे सवाल किया था, वो मुझसे कुछ पूछती इससे पहले मैंने बोला, अरे तुम किसी हो, यहाँ अचानक, सब ठीक तो है, वो मेरे सवालों का जवाब देती उससे पहले ही मेरी नजर उसके चेहरे पर गई, न मांग में सिंदूर था, न गले मे मंगल सूत्र, मैंने फिर सवाल किया ये क्या हाल बना रखा है तुमने, क्या हुआ ? मेरे सवालों को दोहराते हुए गुंजन ने बोला अरे बाबा वही तो पूछ रही हूँ, कि ये क्या हाल बना रखा है ? मैंने कहा ये सब तो ऐसे ही है ये छोड़ो तुम  बताओ  की माथे पर से सिंदूर गायब, न गले मे मंगलसूत्र आखिर हुआ क्या ? मायूसी भरे चेहरे क…

मोदी जी! कतरास और मेरी पहचान मिटाने का दोषी कौन ?

देश की सत्ता जहाँ से चलती है वहाँ से 1280 किलोमीटर दूर मेरी एक पहचान मिट गई । अब मैं उसके बारे में सिर्फ यादों के हिसाब से बात कर पाऊंगा । कभी वहाँ जाकर उसका प्रत्यक्षदर्शी नही बन पाऊंगा । पीएमओ और रेल विभाग ने झारखंड के जिला धनबाद के अंतर्गत आने वाले कतरास गढ़ और चंद्रपुरा रेल लाइन को बंद कर दिया है । तकरीबन 32 किलोमीटर की रेल लाइन बन्द हो गयी ।  सरकार कह रही है कि रेल की पटरियों के नीचे आग का दरिया बह रहा है जो कभी भी ट्रेन में सफर करने वाले हज़ारों लोगो को अपने अंदर ले सकता है । तो जाहिर है कि सरकार ने जनहित में ये फैसला ले लिया । आप लोग मेरे यादों से बहुत दूर है तो सबसे पहले आपका और मेरी यादों का परिचय होना जरूरी है । मैं वही कतरास और चंद्रपुरा के बीच रहता था । मंडल केंदुआडीह के पास एक रेलवे हाल्ट है बुदौढा । हम ,पापा और मेरे बड़े भाई अक्सर शनिवार को यहाँ से ट्रेन पकड़ के कतरास जाया करते थे और ये लगभग हर हफ्ते होता था । पापा घर के लिए समान खरीदने जाते और हम और भैया मीठा खोआ वाला समोसा खाने । कतरास हमारे इलाके का आज भी सबसे बड़ा बाजार है धनबाद और झरिया के बाद । कतरास का दुर्गा पूजा तो आ…

ये जो देश मेरा महान है ......!

जय जवान और जय किसान, ये नारा तो हम सब जानते है कि किसने दिया है लेकिन अब ये एक सवाल भी है कि क्या अब भी जय किसान है , अगर है तो जो लोग कह रहे है कि इस देश में अब भी किसान की जय है तो फिर सवाल ये है कि उनपर गोली क्यों चलाई गई, मध्यप्रदेश की घटना पूरे देश में चर्चा का विषय है कि शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार ने किसानो पर गोली चलवा दी और 5 लोगों की जान चली गई. पहले तो पुलिस और सरकार ने किसी तरह की गोली चलाए जाने के आदेश से इनकार किया लेकिन आईजी ने बाद में माना की पुलिस ने गोली चलाई है . ये देश का दुर्भाग्य है कि जो अन्नदाता इस देश का मतदाता भी है उसके हालत पर कोई गंभीर नहीं है.गंभीरता होती तो आप खुद सोचिए की कैसे जिस राज्य के किसान सड़कों पर है उस राज्य को 3 साल लगातार कृषि रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाता रहा... डॉ. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नवंबर 2004 को 'नेशनल कमीशन ऑन फारमर्स' बना था. दो सालों में इस कमेटी ने 6 रिपोर्ट तैयार की. इन रिपोर्ट्स में तेज और समावेशी विकास की खातिर सुझाव दिए गए थे. फ़सल उत्पादन मूल्य से पचास प्रतिशत ज़्यादा दाम किसानों को मिले. क…